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शांत रस के 10 उदाहरण:

शांत रस  10 examples:

    1. “मन रे तन कागद का पुतला” – कबीर
    2. “कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगौ” – तुलसीदास
    3. “मन पछितैहै अवसर बीते” – रहीम
    4. “तपस्वी! क्यों इतने हो क्लांत” – महादेवी वर्मा
    5. “मन रे!” – सूरदास
    6. “आजकल तेरी याद सताती है” – रामधारी सिंह दिनकर
    7. “यह कैसा सन्नाटा है” – जयशंकर प्रसाद
    8. “जब मैं था तब हरि नहीं” – अज्ञात
    9. “नहीं, नहीं अब मैं रोऊँगी नहीं” – सुमित्रानंदन पंत
    10. “धरती पर लुटेरा आकाश में लुटेरा” – भवानीप्रसाद मिश्र

    अन्य उदाहरण:

    • “एक बार फिर आँखें बंद कर” – गजानन माधव मुक्तिबोध
    • “जिसके आने से जीवन में” – शिवमंगल सिंह सुमन
    • “आँखों में नमी होठों पर मुस्कान” – रामनाथ ‘सुमन’
    • “क्यों न रोऊँ मैं” – महावीर प्रसाद द्विवेदी
    • “हे मानव! तू कब तक” – रामकृष्ण परमहंस

    ध्यान दें:

    • शांत रस में भावनाओं का संयम और शांतिपूर्ण स्वीकृति होती है।
    • शांत रस के उदाहरणों में प्रकृति का वर्णन, जीवन के प्रति आत्मविश्वास, और जीवन की क्षणभंगुरता का स्वीकार शामिल हो सकता है।

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